क्या आपको पता है मील के पत्थर 4 रंग में क्यों होते हैं?

सड़क पर सफर करते वक्त अक्सर आप अलग अलग रंग के मील के पत्थर देखते हैं। ये पत्थर आपको ये बताते हैं कि आपकी मंजिल कितनी दूर है, लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि इन पत्थरों का रंग अक्सर अलग अलग क्यों होता है? अक्सर लोग सिर्फ किलोमीटर और दूरी देखकर नज़रें फेर लेते हैं लेकिन ये गौर करना भूल जाते हैं कि किलोमीटर दर किलोमीटर बदलते मील के पत्थरों का रंग भी बदलता जाता है। आइए आपको बताएं कि मील के पत्थरों का रंग अलग अलग यानी पीला, हरा, काला और नारंगी क्यों होता है।

मील के पत्थर सफर के दौरान एक मार्कर का काम करते हैं। ये बताते हैं कि क्या आप सही दिशा में चल रहे हैं या नहीं? ज्यादातर ये पत्थर हर किलोमीटर पर लगाए जाते हैं। लेकिन इनके अलग-अलग रंग का भी खास मतलब होता है।

पीले रंग के मील का पत्थर का मतलब क्या?

अगर आपको सड़क पर में पीले रंग के पत्थर दिखे, तो समझ जाइए कि अभी आप नेशनल हाईवे पर हैं। देश में नेशनल हाईवे का नेटवर्क 1,65,000 किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। ये हाईवे राज्यों और शहरों को आपस में जोड़ते हैं। केन्द्र सरकार इन हाईवे की देखरेख करती है।

हरे रंग के मील का पत्थर का मतलब क्या?

आपने कई जगह इन मील के पत्थरों का रंग हरा भी नोटिस किया होगा। यदि आपको हरे रंग के पट्टे दिखें, तो इसका मतलब है कि आप नेशनल हाईवे से निकल कर स्टेट हाईवे पर पहुंच चुके हैं। आपको बता दें कि स्टेट हाईवे राज्यों और जिलों को आपस में जोड़ते हैं। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी राज्य सरकार के हाथों में होती है।

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काले रंग के मील का पत्थर का मतलब क्या?

क्या आपने कभी इन माइलस्टोन को काले रंग से पेंट देखा है? अगर हां, तो इसका मतलब है कि अब आप ट्रैवल करते हुए किसी बड़े शहर या जिले में प्रवेश कर चुके हैं। यहां की सड़कों की जिम्मेदारी जिला प्रसाशन की होती है।

नारंगी रंग के मील का पत्थर का मतलब क्या?

अगर आपकी नजर नारंगी रंग के माइलस्टोन पर पड़े, तो समझ जाएं कि आप किसी गांव में आ चुके हैं। ये सडकें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनाई गई होती हैं।

उम्मीद है मील के पत्थरों को लेकर उपर दी गई जानकारी आपको जरुर पसंद आई होगी।

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